हालात से नही है हार देखे कैसे लड़ा ये परिवार (An fictional story)




चलो आज एक जिंदगी सफर पर चलते हैं 
शुरुआत से ही तालुकात करते हैं,

आम सी जिंदगी मेरी अनहोनियों सी थी भरी
जो लिख रहा अपनी ज़ुबानी ये सारी , 
अकेले कुछ अंदर अपना ही था में किनारा सा
सोच न कभी मिलेगा कोई मुझे सहारा सा,
मेरी पत्नी का नाम है मिष्टी
वो ही मेंरी जान और मेरी पुरी सृष्टि, 
रब ने भी बोल जा अपनी खुशियो से आमिल तू है काबिल इसलिये तेरी ख्वाइशओ में भी शामिल,
 इसी तरह खुशियों से कुछ महीने थे बीते 
एकदूसरे के साथ से हर समय से थे जीते ।

घर के साथ मुझे भी उसने ले लिया संभाल
रब से मै  पूछता ये तूने कैसा किया ये क़माल,
इसमे भी पूरा हुआ हमारा नया अरमान
ज़िन्दगी में आया हमारे तीसरा मेहमान,
वो बानी हमारे लिए ख्वाईशो की जीनू 
प्यारी बेटी का नाम रखा हमने पीहू,
उसके आने से ज़िन्दगी सुहानी सी हुई 
रोज़ हस्ते चेहरो में गुम कहानी सी हुई, 
ज़िन्दगी हमपे भी ऐतबार थी कर रही 
अब मिष्टी के संग पीहू भी शाम को मेरा इंतेज़ार थी कर रही कभी साथ घूमना था तो कभी पीहू संग खेलना
तो कभी अच्छा-बुरा पल से साथ से झेलना,
ज़िन्दगी के हसीन दिन रहे थे चल 
हादसों से सीखे के हम खड़े थे अटल। 

गरीबी से हम ऊपर रहे थे चढ़ 
मेहनत और हौसले रखे आगे  रखे थे बढ़,
भविष्य का सोच रहा था मे कही हर पल 
सवारना था आशियाने से पीहू का भी कल, 
कुछ छोटी हँसी-खुशी भी हम तीनों में थी बट रही
 हर गमो की बरसात भी अच्छे थी कट रही, 
अपने परिवार के सपनो केलिए छोड़ा मैने घर
खुद के सपनो की ली ना कोई खबर,
तीनो कि आंखे थी नम रुका न अश्को का सबर
शब्दो मे न बया कर पाऊंगा जज़्बातों की ये डर, 
हाथो में थे हाथ, बाहो में शायद आखरी बार थी वो बात 
पता ना था आखरी बार हम तीनों की साथ थी वो मुलाक़ात
पर निकल गया नए काम के अंजान से सफर पे 
बस जाना था बस खुद के ऊपर के शिखर पे, 
अस्त हो जाउ पर कामो कष्ट-स्पष्ट ही करुंगा 
अब मै आनेवाले हालात से भी नही डरूंगा । 

इसीके साथ छोड़ के घर किया था गुनाह 
किसी तरह होसले लेके में पोहचा मैं पुना, 
तीनो के ऑंखो में आसुओ का रोज़ था होना 
जाने के बाद परिवार अकेला और घर पड़ गया सूना 
कुछ ही दिन ठीक गुज़र रहे थे नई जगह में 
सोच रहा क्या में खुश ऐसे जीने की वजह में, 
ऐसेमें किस्मत नई कोशिश थीं 
पता नही था आगे चुनौतीयो की लंबी साज़िश थी ,
आगे पैसों की हुई कमी हारते हुए सामने क्या था और आना
देश पे छाया ये काला साया ये कोरोना 
रोज़ मिष्टी का आधे पेट था रहना और पीहू का दूध बिना सोना सब सुनके अकेले में टुटके था मेंरा रोना,
अमीरो की बीमारी ने क्या ऐसा खेल  ये रचाया 
अपनो से तोड़के ,परायो से मिलाया ।

ऐसे में खुदके संग मिष्टी को समझाया
डर मत हम सबको खुदा न करेगा पराया, 
आज रुलाएगा पर कल हरा के भी जरूर जिताएगा
दिन ढलाके फिर नया सवेरा भी वो ही लाएगा , 
कुछ ऐसी बाते घर पे थी होती 
कभी उपर से मिष्टी हस्ती बाते  तो कभी सिसकियो में वो सोती, 
पीहू तो दरवाज़े पे मेरा इंतेज़ार करती और मेरे वहाँ न दिखने पर उस्का रोना
अब उसके चेहरे की वो मुस्कुराहट का भी था खोना , 
उसकेलिए बस उसके सामने पापा चाहिए था होना
रोज़ भगवान से प्राथना करके उसका भी था सोना ,
इसी तरह फ़ोन पे रोज़ लंबे होते थे कॉल 
पर कहाँ मेरे जैसे लोग कर पाते वीडियो कॉल,
अमीरो की बीमारी ने क्या ऐसा खेल ह रचाया
अपनो से तोड़के, परायो से मिलाया । 

हर वक़्त मिष्टी मुझसे कह रही 
आपके बिना , दिल पे पत्थर रख कर रह रही,
मैंने बोला बस खुदको संभाल के सब कुछ है कराना
हम दोनों के साथ से पीहू को आगे लेके है चलाना , 
ज़िंदगी पता नही हुआ ये खेल? 
जहाँ अपनो से रहा ना कोई मेल,
मिष्टी ने कहाँ दिलसे करती रोज़ आपके सलामती की पूजा  कहती आपके बिना हम दोनों का कहाँ कोई दूजा, 
अब बस अपने आप से नही है रुकना
अब मुसीबतो के सामने नही है झुकना ,
तुम दोनों के प्यार से मिली माँ की खोई हुई छाया
जिसे मैने हमेशा है दिल मे समाया,
अमीरो को बीमारी ने क्या ऐसा खेल ये रचाया 
अपनो से तोड़के, परायो से मिलाया। 

कुछ दिनों में मौत का भी हो सकता था नसीब 
उनको जो दे सकता वो रखा था करीब,
ऐसे में गायब होता दिखा परेशानियो का काल 
मुझे कुछ लोगो ने फरिश्तो की तरह लिया संभाल, 
रोज़ दो वक़्त का खाना देकर जीवन बचाया 
इंसानियत बची ह उन्होंने फिर से जताया, 
करके कमाल उन्होंने बोला वी आर रेडी फ़ॉर ऑल
कल तुम अपने घर पे कर लेना वीडियो कॉल,
मिष्टी ने मांग के पास से फ़ोन किया ये सपना मुकमल
उसदिन हम तीनों के हस्ते -रोते थी वो हलचल
मैने कहाँ था पीहू से अचछी रहोगीं तो तुम्हारे लिए तोफा लाएंगे  खयाल रखो अपना पापा जल्दी से घर पे भी आएंगे 
बस इंतज़ार है घर पे सब के साथ फिर से होने का
फिर से बाते और हँसी में वही थकान में खोने का 
अमीरो की बीमारी ने क्या ऐसा खेल है रचाया, 
अपनो से तोड़के आज परायो से मिलाया।। 


जाते जाते बस यही सबसे  कहूंगा.........
इस हालत ने एक बात सीखा दी ,वक़्त कितना भी बुरा चल रहा हो अगर अपनो का साथ और हिम्मत  तो  वक़्त के पासे फिर से पलटेंगे , बस अपनी जगह डटे रहना जरूरी है ,और न कोई साथ देनेवाला बस खुद पे और खुदा पे रखो भरोसा सब अच्छा और ठीक होगा सब के लिए हमारी सलामती है दुआ  ,शायद जल्दी  सब ठीक होगा और फिर मै अपने घर लौटूंगा और सब मे संग नई कहानी भी लाऊंगा ,तब तक के हमारी तरफ से अगर जरूरत न हो तो घर पे रहो "खुद भी सुरक्षित रहो और अपने अपनो और सब को भी सुरक्षित रखो" और हमारे लिये जो इस वक़्त बाहर काम कर रहै है उन्हें धन्यवाद और दिल से सलाम ।और हा "जैसे भी हालात हो बस मुस्कुराकर  आगे बढ़ते रहो  सब अच्छा ही होगा ".















































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